हिमालय महाकुंभ पर बड़ा फैसला: 2026 में ही होगी मां नंदा की ‘बड़ी जात’, महापंचायत ने कुरुड़ से भरी हुंकार
‘नंदा राजजात’ नहीं, पारंपरिक नाम ‘बड़ी जात’ से पहचानी जाएगी यात्रा; 23 जनवरी को बसंत पंचमी पर निकलेगा शुभ मुहूर्त
देहरादून: सदियों पुरानी आस्था और हिमालयी संस्कृति के प्रतीक ‘नंदा देवी महाकुंभ’ को लेकर चल रहे संशय के बादल अब छंट गए हैं। नंदानगर विकासखंड में आयोजित 484 गांवों की ऐतिहासिक महापंचायत ने एक स्वर में ऐलान किया है कि वर्ष 2026 में ही ‘नंदा की बड़ी जात’ (ठुलि जात) का भव्य आयोजन किया जाएगा। सिद्धपीठ नंदा देवी मंदिर, कुरुड़ से शुरू होने वाली यह यात्रा अपनी प्राचीन परंपराओं और लोक मान्यताओं के अनुसार ही संपन्न होगी।
परंपरा से समझौता नहीं: स्थगित करने का फैसला खारिज
हाल ही में ‘नंदा राजजात समिति नौटी’ द्वारा यात्रा को 2027 तक टालने के निर्णय को महापंचायत ने सिरे से खारिज कर दिया। ग्रामीणों और धर्माचार्यों का कहना है कि यह आस्था का विषय है, किसी संस्था का व्यक्तिगत फैसला नहीं। महापंचायत ने स्पष्ट किया कि यात्रा अपने निर्धारित समय यानी अगस्त-सितंबर 2026 में ही होगी।
मुख्य निर्णय: राजनीति और राजशाही से दूर रहेगी आस्था
महापंचायत में लिए गए कुछ महत्वपूर्ण निर्णय इस प्रकार हैं:
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नया नाम, वही पहचान: अब इस यात्रा को ‘नंदा राजजात’ के बजाय इसके पारंपरिक नाम ‘नंदा की बड़ी जात’ से पुकारा जाएगा।
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मुहूर्त की घोषणा: आगामी 23 जनवरी (बसंत पंचमी) को कुरुड़ मंदिर में विधिवत पूजा के बाद यात्रा की सटीक तिथियों (दिनपटा) का ऐलान होगा।
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नई समिति का गठन: यात्रा की व्यवस्थाओं के लिए सेवानिवृत्त कर्नल हरेंद्र सिंह रावत को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया है।
“आस्था में हस्तक्षेप मंजूर नहीं”
नवनिर्वाचित अध्यक्ष कर्नल हरेंद्र सिंह रावत और कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रोतेला ने कहा कि नंदा देवी क्षेत्रवासियों की आराध्य हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस धार्मिक आयोजन को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। महापंचायत ने सरकार से भी मांग की है कि यात्रा को लेकर फैली भ्रांतियों पर स्थिति स्पष्ट की जाए।
क्यों हो रहा था विवाद?
दरअसल, बीते दिनों नौटी समिति ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे की कमी और खराब मौसम का हवाला देते हुए यात्रा को 2027 तक स्थगित करने की बात कही थी। लेकिन कुरुड़ महापंचायत के इस ताजा फैसले ने साफ कर दिया है कि भक्त अपनी ‘नंदा गौरा’ की विदाई (बड़ी जात) के लिए 2026 में ही तैयार हैं।
बैठक की झलकियाँ:
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प्रतिभाग: 484 गांवों के जनप्रतिनिधि, महिला मंगल दल और बुद्धिजीवी।
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संकल्प: लोक परंपराओं और गुणवत्तापूर्ण व्यवस्थाओं के साथ यात्रा का सफल संचालन।
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संदेश: लोक विश्वास और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा।

