Monday, January 26, 2026
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SYL विवाद: क्या 27 को सुलझेगी दशकों पुरानी उलझन? हरियाणा निवास में आमने-सामने होंगे नायब सैनी और भगवंत मान

दशकों से अटकी नहर और पानी के हक की लड़ाई; हरियाणा के ‘प्यास’ और पंजाब के ‘तर्क’ के बीच क्या निकलेगा कोई बीच का रास्ता?

चंडीगढ़: उत्तर भारत की सियासत और भूगोल को प्रभावित करने वाला दशकों पुराना सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। आगामी 27 जनवरी को चंडीगढ़ स्थित हरियाणा निवास में सुबह 9:30 बजे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और केंद्र सरकार की मध्यस्थता के बीच होने वाली इस बैठक से दोनों राज्यों के करोड़ों किसानों और नागरिकों को बड़ी उम्मीदें हैं।

क्यों अहम है यह बैठक?

पिछले कुछ वर्षों में आधा दर्जन बैठकें बेनतीजा रहने के बाद, अब दोनों मुख्यमंत्री एक बार फिर टेबल पर बैठ रहे हैं।

  • हरियाणा का पक्ष: मुख्यमंत्री नायब सैनी का तर्क है कि हरियाणा न केवल अपने हिस्से का पानी दिल्ली को दे रहा है, बल्कि नहर न बनने के कारण राज्य के दक्षिणी हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं। हरियाणा को उसके हिस्से का पूरा 3.5 MAF पानी मिलना चाहिए।

  • पंजाब का तर्क: मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि पंजाब के पास अतिरिक्त पानी नहीं है। उन्होंने केंद्र को सुझाव दिया है कि यदि सिंधु नदी का पानी डायवर्ट किया जाए, तो पंजाब न केवल हरियाणा बल्कि राजस्थान की प्यास भी बुझा सकता है।

विवाद की जड़: क्या है SYL का गणित?

यह विवाद केवल राजनीति नहीं, बल्कि आंकड़ों और अस्तित्व की लड़ाई है:

  1. समझौता (1981): रावी-ब्यास नदियों के पानी के बंटवारे के लिए 214 किमी लंबी नहर बननी थी।

  2. हरियाणा की स्थिति: हरियाणा ने अपने हिस्से की 92 किमी नहर का निर्माण पूरा कर लिया है।

  3. पंजाब की स्थिति: पंजाब में 122 किमी नहर बननी थी, लेकिन काम बीच में रुक गया और जमीन को दोबारा समतल (Denotify) कर दिया गया।

  4. पानी का नुकसान: वर्तमान में हरियाणा को सिर्फ 1.62 MAF पानी मिल रहा है, जबकि उसके हिस्से का 1.88 MAF पानी पंजाब इस्तेमाल कर रहा है।

अब तक का सफर: बैठकों का दौर

पिछले कुछ समय में हुई प्रमुख बैठकें किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच सकीं:

  • 6 अगस्त 2025: नई दिल्ली में सकारात्मक बातचीत का दावा।

  • 9 जुलाई 2025: केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल की मौजूदगी में चर्चा।

  • 2023-24: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चंडीगढ़ और दिल्ली में कई दौर की वार्ता।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

साल 2016 में सुप्रीम कोर्ट पहले ही हरियाणा के पक्ष में फैसला सुना चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर नहर का निर्माण अभी भी अधर में है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या 27 तारीख को दोनों मुख्यमंत्री किसी ‘विन-विन’ फॉर्मूले पर सहमत हो पाएंगे?


बैठक का विवरण:

  • स्थान: हरियाणा निवास, चंडीगढ़

  • समय: सुबह 09:30 बजे (मंगलवार, 27 जनवरी)

  • मुख्य प्रतिभागी: मुख्यमंत्री नायब सैनी, मुख्यमंत्री भगवंत मान और दोनों राज्यों के आला अधिकारी।