संघर्ष से सिद्धि तक: देवभूमि के ‘दाज्यू’ भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण, महरगाड़ की पगडंडियों से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
पद्म पुरस्कारों की घोषणा: पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल के सेवा और समर्पण को राष्ट्र का सलाम; खुशी से झूमा उत्तराखंड
देहरादून: गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या उत्तराखंड के लिए गौरवपूर्ण रही। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा घोषित देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को ‘पद्म भूषण’ से नवाजा गया है। यह सम्मान केवल एक राजनेता की उपलब्धि नहीं, बल्कि एक साधारण पहाड़ी परिवार के बेटे के उस अडिग संकल्प की जीत है, जिसने अभावों को कभी अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया।
महरगाड़ का वो बालक: जब 8 किमी पैदल चलकर जाते थे स्कूल
भगत सिंह कोश्यारी का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। बागेश्वर जिले के एक छोटे से गाँव महरगाड़ में जन्में कोश्यारी का बचपन बेहद आर्थिक तंगहाली में बीता। उनके जीवन के संघर्ष का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:
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उन्होंने जूनियर हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए प्रतिदिन अपने गाँव से 8 किलोमीटर दूर शामा तक पैदल सफर किया।
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पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा से उच्च शिक्षा प्राप्त करते समय उन्होंने ट्यूशन पढ़ाया और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अंग्रेजी में एमए (MA) की डिग्री हासिल की।
RSS से नाता और समाज सेवा का संकल्प
वर्ष 1966 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संपर्क में आने के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। एक समर्पित स्वयंसेवक और प्रचारक के रूप में उन्होंने अपना सर्वस्व समाज को अर्पित कर दिया। 1977 में उन्होंने पिथौरागढ़ में सरस्वती शिशु मंदिर की नींव रखी, जहाँ उन्होंने वर्षों तक बच्चों को शिक्षा दी। आज भी लोग उन्हें प्यार से ‘दाज्यू’ (बड़े भाई) कहकर पुकारते हैं।
संसदीय राजनीति के ‘भीष्म पितामह’
भगत सिंह कोश्यारी का राजनीतिक करियर हार और जीत से कहीं ऊपर सेवा का रहा है:
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पहली हार, बड़ी सीख: 1989 में अल्मोड़ा से लोकसभा चुनाव हारे, लेकिन जनसेवा नहीं छोड़ी।
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मंत्री से मुख्यमंत्री तक: उत्तराखंड की अंतरिम सरकार में ऊर्जा एवं सिंचाई मंत्री रहे और फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली।
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संसद के दोनों सदनों का अनुभव: वे राज्यसभा और लोकसभा दोनों के सदस्य रहे, जो उनके गहरे विधायी अनुभव को दर्शाता है।
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राजभवन का दायित्व: महाराष्ट्र जैसे महत्वपूर्ण राज्य के राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।
उत्तराखंड में जश्न का माहौल
पद्म भूषण की घोषणा होते ही पूरे प्रदेश में हर्ष की लहर दौड़ गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सहित कई दिग्गजों ने इसे उत्तराखंड के गौरवशाली व्यक्तित्व का सम्मान बताया है। लोगों का कहना है कि यह सम्मान उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखते हैं।
संपादकीय टिप्पणी: भगत सिंह कोश्यारी का पद्म भूषण पाना इस बात का प्रमाण है कि यदि आपके भीतर ‘पहाड़’ जैसा अडिग विश्वास और जनता के प्रति प्रेम है, तो सफलता के शिखर तक पहुँचने से आपको कोई नहीं रोक सकता।

