Thursday, August 13, 2026
उत्तराखंडदेहरादून

15 अगस्त को देहरादून के सभी शैक्षणिक संस्थानों में गूंजेगा ‘कन्या भ्रूण संरक्षण’ का संकल्प: बाल लिंगानुपात सुधारने के लिए डीएम की बड़ी पहल

बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को मिलेगी नई धार; स्वतंत्रता दिवस पर छात्र और शिक्षक लेंगे बेटियों की सुरक्षा, समानता और सम्मान की शपथ

देहरादून। बाल लिंगानुपात (Child Sex Ratio) में सुधार लाने और समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच का निर्माण करने के उद्देश्य से देहरादून जिला प्रशासन ने एक संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण पहल की है। आगामी 15 अगस्त 2026 (स्वतंत्रता दिवस) के शुभ अवसर पर जनपद के सभी शैक्षणिक संस्थानों में ‘कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा’ (Save The Girl Child Pledge) दिलाई जाएगी।

जिला समुचित प्राधिकारी (PCPNDT) एवं जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने इस संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी को स्पष्ट और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

डिग्री कॉलेजों से लेकर स्कूलों तक में होगा आयोजन

जारी निर्देशों के अनुसार, 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान जनपद के सभी:

  • सरकारी एवं निजी डिग्री कॉलेजों

  • माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालयों

  • अन्य शैक्षणिक संस्थानों

में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों को सामूहिक रूप से ‘कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा’ दिलाई जाएगी।

क्या होगा ‘कन्या भ्रूण संरक्षण प्रतिज्ञा’ का मुख्य उद्देश्य?

  1. सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार: लिंग भेद और कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाने का संकल्प।

  2. समान अवसर और पोषण: बेटियों को बेटों के समान प्यार, उत्तम स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर देना।

  3. सुरक्षित एवं सम्मानजनक माहौल: घर, परिवार और समाज में ऐसा माहौल तैयार करना जहाँ प्रत्येक बेटी स्वयं को पूर्णतः सुरक्षित महसूस कर सके और गरिमा के साथ जीवन जी सके।

  4. स्वावलंबन पर ज़ोर: बेटियों की उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर (स्वावलंबी) बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रतिबद्धता।

स्वतंत्रता दिवस पर सामाजिक बदलाव का संदेश

15 अगस्त के पावन अवसर पर ध्वजारोहण के साथ-साथ इस तरह के सामाजिक संकल्पों को जोड़ना एक दूरगामी पहल है। युवा पीढ़ी और विद्यार्थियों के बीच बेटियों के संरक्षण का संदेश पहुँचाने से न केवल बाल लिंगानुपात के आंकड़ों में सुधार आएगा, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सम्मान और समानता की भावना भी और मजबूत होगी।