उत्तराखंड में स्थानीय युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए द्वार: PWD और सिंचाई विभाग के बड़े ठेकों को छोटे पैकेजों में बाँटने की तैयारी
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री धामी से की मुलाकात; स्थानीय ठेकेदारों को मिलेंगे अधिक अवसर, आर्थिक गतिविधियों को मिलेगी रफ्तार
देहरादून। उत्तराखंड में स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने और क्षेत्रीय ठेकेदारों को विकास कार्यों में प्राथमिकता देने के उद्देश्य से एक बड़ी पहल शुरू की गई है। प्रदेश के लोक निर्माण, सिंचाई एवं ग्रामीण निर्माण मंत्री सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर लोक निर्माण (PWD) और सिंचाई विभाग के बड़े-बड़े ठेकों को छोटे-छोटे पैकेजों में विभाजित (Split) करने का अनुरोध किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सुझाव को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार आवश्यक परीक्षण और सकारात्मक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
क्यों जरूरी है बड़े ठेकों को छोटे पैकेजों में बाँटना?
सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री के समक्ष पक्ष रखते हुए बताया कि इस व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश को कई व्यावहारिक लाभ मिलेंगे:
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स्थानीय युवाओं को रोजगार: बड़े ठेकों के छोटे पैकेजों में बँटने से उत्तराखंड के छोटे और स्थानीय ठेकेदार टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए सीधे रोजगार के अवसर बनेंगे।
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काम में तेजी और गुणवत्ता: छोटे पैकेजों में काम बँटने से अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ निर्माण कार्य शुरू हो सकेंगे, जिससे विकास कार्यों के क्रियान्वयन में गति आएगी।
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पहाड़ की अर्थव्यवस्था को मजबूती: निविदाएं (Tenders) स्थानीय स्तर पर स्वीकृत होने से धन का प्रवाह क्षेत्र के भीतर ही रहेगा, जिससे ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा।
मुख्यमंत्री धामी ने दिया सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा
कैबिनेट मंत्री के प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता प्रदेश के युवाओं का कल्याण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना है। उन्होंने संबंधित विभागों को इस दिशा में नियमानुसार नीतिगत परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
पलायन रोकने और स्वावलंबन की दिशा में बड़ा कदम
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बड़े टेंडर अक्सर बाहरी या बड़ी कंपनियों के खाते में चले जाते हैं, जिससे स्थानीय युवाओं और छोटे ठेकेदारों को अवसर नहीं मिल पाता। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो यह प्रदेश में स्वदेशी रोजगार, स्थानीय ठेकेदारी और पलायन रोकने की दिशा में एक क्रांतिकारी निर्णय साबित होगा।

