सड़क हादसों पर नकेल कसने की तैयारी: उत्तराखंड में ब्लैक स्पॉट का होगा ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’, बिना हेलमेट और ओवरस्पीडिंग पर कड़ा रुख
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में अनुश्रवण समिति की उच्चस्तरीय बैठक; वैज्ञानिक जांच, स्कूलों में ‘रोड सेफ्टी क्लब’ और 2-3 महीने में विशेष अभियानों के निर्देश
देहरादून। उत्तराखंड की चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थितियों और पर्वतीय मार्गों पर बढ़ते सड़क हादसों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए राज्य सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में बुधवार को आयोजित ‘सड़क सुरक्षा अनुश्रवण समिति’ की उच्चस्तरीय बैठक में हादसों की रोकथाम, ब्लैक स्पॉट सुधार, सड़क इंजीनियरिंग और जागरूकता अभियानों की विस्तृत समीक्षा की गई।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को दोटूक निर्देश दिए कि सड़क हादसों को केवल चालक की गलती मानने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से तकनीकी खामियों की जांच की जाए और दोषियों व कमियों पर त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई हो।
1. हादसों की होगी वैज्ञानिक जांच और ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सड़क दुर्घटनाओं के कारणों का साइंटिफिक विश्लेषण (Scientific Analysis) किया जाए।
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रोड ज्योमेट्री व डिजाइन जांच: जिन स्थानों पर सड़क की बनावट, संकरे मोड़ या तकनीकी डिजाइन हादसों की वजह बन रहे हैं, उनका तत्काल सुधार किया जाए।
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ब्लैक स्पॉट का ऑडिट: राज्य के सभी चिन्हित दुर्घटना संभावित क्षेत्रों (Black Spots) और बस अड्डों का नियमित ‘थर्ड पार्टी ऑडिट’ कराया जाएगा।
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पर्वतीय क्षेत्रों में सुरक्षा: वन और लोक निर्माण विभाग (PWD) को पहाड़ के संवेदनशील मार्गों पर क्रैश बैरियर और पैराफिट लगाने के काम तय समय सीमा में पूरे करने के निर्देश दिए गए।
2. नियम तोड़ने वालों पर सख्ती: हेलमेट और ओवरस्पीडिंग पर नकेल
सड़क सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने के आदेश दिए गए हैं:
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डबल हेलमेट अनिवार्य: दोपहिया वाहन चालक और पीछे बैठे सह-यात्री दोनों के लिए बीआईएस (BIS) मानकों वाले हेलमेट का इस्तेमाल अनिवार्य रूप से लागू कराया जाएगा।
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प्रवर्तन कार्रवाई: ओवरस्पीडिंग, ड्रंक एंड ड्राइव और मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर पुलिस व परिवहन विभाग नियमित चेकिंग अभियान चलाएंगे।
3. स्कूलों में ‘रोड सेफ्टी क्लब’ और हर 2-3 महीने में जागरूकता अभियान
जागरूकता को सिर्फ औपचारिक कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए मुख्य सचिव ने सालभर का पब्लिसिटी कैलेंडर तैयार करने को कहा।
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रोड सेफ्टी क्लब: शिक्षा और परिवहन विभाग के समन्वय से सभी सरकारी व निजी विद्यालयों में ‘सड़क सुरक्षा क्लब’ बनाए जाएंगे ताकि युवाओं में यातायात नियमों के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागे।
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सिनेमाघरों में फिल्में: स्थानीय सिनेमाघरों और थिएटरों में फिल्म शो से पहले सड़क सुरक्षा जागरूकता फिल्में दिखाई जाएंगी।
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राहवीर योजना व हिट एंड रन: ‘राहवीर योजना’ (नेक दिल मददगारों के लिए योजना) का व्यापक प्रचार करने के साथ ही हिट एंड रन के लंबित मामलों की सूची जिलाधिकारियों (DM) को सौंपकर त्वरित मुआवजा व निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
4. रेस्क्यू और त्वरित उपचार के लिए संयुक्त वर्कशॉप
दुर्घटना के तुरंत बाद ‘गोल्डन आवर’ में घायल की जान बचाने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य और परिवहन विभाग को मिलकर संयुक्त वर्कशॉप आयोजित करने को कहा गया है, ताकि त्वरित रेस्क्यू और प्राथमिक चिकित्सा प्रणाली को और बेहतर बनाया जा सके।
“सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए केवल चालान काटना काफी नहीं है। इसके लिए सड़क की इंजीनियरिंग, वाहनों की स्थिति, चालक का व्यवहार, जन-जागरूकता और हादसे के बाद तुरंत बेहतर इलाज—इन सभी पहलुओं पर एक साथ काम करना होगा।”
— आनंद बर्द्धन, मुख्य सचिव (उत्तराखंड)
पहाड़ों में सुरक्षित सफर की ओर मजबूत कदम
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में सड़क सुरक्षा केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि हर यात्री के जीवन से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है। ब्लैक स्पॉट्स का वैज्ञानिक ऑडिट और ‘राहवीर योजना’ जैसी पहलों से न केवल सड़कों की तकनीकी खामियां दूर होंगी, बल्कि हादसों के बाद घायलों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर कई जिंदगियों को बचाया जा सकेगा।

