मां यमुना की शीतकालीन गद्दी खरसाली में आधी रात बरपा आग का कहर; ग्रामीणों की एकजुटता ने टाला बड़ा हादसा, पर स्वाहा हुई चार परिवारों की पूंजी
यमुनोत्री धाम के पास खरसाली गांव में भीषण अग्निकांड। दुकानों, अनाज के कोठार और मशीनों समेत लाखों की संपत्ति जलकर राख; ग्राम प्रधान ने सरकार से लगाई प्रभावितों की मदद के लिए गुहार।
उत्तरकाशी (11 जनवरी 2026): उत्तरकाशी जनपद के सुदूरवर्ती क्षेत्र और मां यमुना के शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है। बीती देर रात जब पूरा गांव गहरी नींद में था, अचानक भड़की आग की लपटों ने चार परिवारों की दुनिया बदल दी। यमुनोत्री धाम से सटे इस पौराणिक गांव में आग लगने से चारों ओर अफरा-तफरी मच गई।
लाखों का नुकसान: राख में बदली मेहनत की कमाई
इस भीषण अग्निकांड में चार परिवारों की दुकानों और रिहायशी हिस्सों को भारी नुकसान पहुँचा है। घटना की विभीषिका का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:
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आजीविका पर प्रहार: एक स्थानीय कारपेंटर (बढ़ई) की कीमती मशीनें जलकर बेकार हो गई हैं।
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अनाज का संकट: सर्दियों के लिए जमा किया गया अनाज भंडारण का ‘कोठार’ पूरी तरह खाक हो गया।
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निजी संपत्ति: घरों के साथ-साथ एक स्कूटी और रसोईघर भी आग की भेंट चढ़ गए।
देवदूत बनकर उभरे ग्रामीण: सामूहिक प्रयासों से बचा गांव
खरसाली जैसे दुर्गम इलाकों में अग्निशमन सेवाओं का समय पर पहुंचना एक बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में गांव वालों ने अभूतपूर्व साहस का परिचय दिया। आग की लपटों को देख ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकल आए और कड़ाके की ठंड में बाल्टियों और पारंपरिक तरीकों से आग बुझाने में जुट गए। उनकी इस मुस्तैदी के कारण आग पूरे गांव में नहीं फैल सकी, जिससे एक बहुत बड़ी जनहानि और भीषण त्रासदी टल गई।
प्रशासन से मदद की गुहार
ग्राम प्रधान नीतू उनियाल ने घटना की पुष्टि करते हुए राहत की सांस ली कि किसी इंसान या पशु को कोई नुकसान नहीं पहुँचा। हालांकि, उन्होंने प्रभावित परिवारों की आर्थिक स्थिति पर चिंता जताई है।
“ग्रामीणों ने अपनी मेहनत से आग पर काबू पाया, लेकिन चार परिवारों का सब कुछ खत्म हो गया है। प्रशासन से हमारी पुरजोर मांग है कि नुकसान का जल्द से जल्द आकलन (Survey) कर प्रभावितों को तत्काल राहत राशि प्रदान की जाए ताकि वे फिर से अपना जीवन पटरी पर ला सकें।” — नीतू उनियाल, ग्राम प्रधान, खरसाली
निष्कर्ष: पहाड़ों में ‘फायर सेफ्टी’ फिर चर्चा में
खरसाली की इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ों के पारंपरिक लकड़ी के घरों में आग लगने के खतरों और वहां अग्निशमन सुविधाओं की कमी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में प्रभावित परिवार खुले आसमान के नीचे या पड़ोसियों के सहारे हैं, जिन्हें शासन के तत्काल हस्तक्षेप की उम्मीद है।

