#AkalTakht: आस्था की डगर पर ‘आम आदमी’; नंगे पांव और जाप करते हुए जत्थेदार के सामने पेश होंगे CM भगवंत मान
दोपहर 12 बजे अकाल तख्त के सचिवालय में देंगे स्पष्टीकरण; मुख्यमंत्री की ‘लाइव प्रसारण’ की मांग पर सबकी नजर। मर्यादा का पालन: ‘अमृतधारी’ न होने के कारण ‘फसील’ की जगह सचिवालय में होगी पेशी।
अमृतसर: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के लिए आज का दिन आत्म-मंथन और धार्मिक जवाबदेही का है। दोपहर 12 बजे वे श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज के समक्ष पेश होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करेंगे। मुख्यमंत्री ने इस विशेष दिन को पूरी तरह से आध्यात्मिक मर्यादा के नाम कर दिया है।
विनीत भाव: नंगे पांव तय करेंगे हेरिटेज स्ट्रीट का सफर
मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, भगवंत मान एक सामान्य श्रद्धालु की तरह अमृतसर की प्रसिद्ध हेरिटेज स्ट्रीट से नंगे पांव चलते हुए अकाल तख्त साहिब तक पहुंचेंगे। इस दौरान वे ‘वाहेगुरु’ का जाप करते हुए नतमस्तक होंगे। यह दृश्य पंजाब की राजनीति में एक मुख्यमंत्री की विनम्रता और आस्था के प्रति उनके गहरे जुड़ाव को दर्शाता है।
पारदर्शिता की मांग: “संगत को पता चले पूरी सच्चाई”
मुख्यमंत्री मान ने इस पेशी को लेकर एक अभूतपूर्व मांग रखी है। उन्होंने अकाल तख्त साहिब से अनुरोध किया है कि जत्थेदार के साथ होने वाली पूरी पूछताछ और बातचीत का लाइव प्रसारण (Live Telecast) किया जाए।
“मैं चाहता हूँ कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे ताकि देश-विदेश में बैठी सिख संगत को असलियत की जानकारी मिल सके।” — भगवंत मान, मुख्यमंत्री
धार्मिक मर्यादा और प्रोटोकॉल
श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से इस पेशी को लेकर नियम स्पष्ट कर दिए गए हैं।
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सचिवालय में पेशी: चूंकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ‘अमृतधारी’ (दीक्षित) सिख नहीं हैं, इसलिए मर्यादा के अनुसार उन्हें अकाल तख्त की ‘फसील’ (पवित्र चबूतरा) पर पेश होने की अनुमति नहीं है।
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नियम का पालन: उन्हें अकाल तख्त साहिब के सचिवालय में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं, जहाँ पांच सिंह साहबान के साथ उनकी बातचीत होगी।
निष्कर्ष: राजनीति और धर्म के बीच की मर्यादा
आज की इस पेशी पर न केवल पंजाब, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया स्पष्टीकरण जत्थेदार और सिख समाज को कितना संतुष्ट कर पाता है। भगवंत मान का यह कदम यह भी संदेश देता है कि सत्ता के शिखर पर होने के बावजूद, वह पंथिक परंपराओं और धार्मिक अनुशासन के प्रति जवाबदेह हैं।

