त्याग और साहस की प्रतिमूर्ति माता रमाबाई आंबेडकर को सीएम धामी ने किया नमन, बोले- “उनका जीवन सामाजिक चेतना की नई दिशा है”
नारी सशक्तिकरण की मिसाल: मुख्यमंत्री ने रमाबाई आंबेडकर की जयंती पर दी श्रद्धांजलि; समानता और न्याय के संकल्प को दोहराया
देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नारी शक्ति की प्रेरणास्रोत और अदम्य साहस की प्रतीक माता रमाबाई आंबेडकर की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने माता रमाबाई के जीवन संघर्षों को याद करते हुए उन्हें सामाजिक समरसता और धैर्य का सबसे बड़ा उदाहरण बताया।
संघर्षों के बीच धैर्य की शक्ति
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संदेश में माता रमाबाई आंबेडकर के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा:
“माता रमाबाई का जीवन संघर्षों की पराकाष्ठा था, लेकिन उन्होंने अपने धैर्य और आत्मबल से कभी हार नहीं मानी। उन्होंने न केवल बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर का हर कदम पर साथ दिया, बल्कि समाज में दबे-कुचले वर्गों के अधिकारों और सामाजिक चेतना को एक नई दिशा प्रदान की।”
समानता और न्याय की प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि रमाबाई आंबेडकर का व्यक्तित्व आज के समय में भी समाज के लिए उतना ही प्रासंगिक है। उनके जीवन मूल्य हमें निम्नलिखित गुणों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देते हैं:
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समानता और न्याय: समाज के हर वर्ग को समान अधिकार दिलाने के प्रति अटूट निष्ठा।
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नारी सशक्तिकरण: कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा और अधिकारों के लिए संघर्ष।
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त्याग और समर्पण: राष्ट्र निर्माण और सामाजिक सुधार के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करना।
आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक
मुख्यमंत्री ने कहा कि माता रमाबाई का जीवन नारी सशक्तिकरण का एक जीवंत अध्याय है। उनके विचार और आदर्श आने वाली पीढ़ियों को मानवीय मूल्यों के साथ समाज को एकजुट रखने का मार्ग दिखाते रहेंगे। आज की युवा पीढ़ी को उनके जीवन से विपरीत परिस्थितियों में अडिग रहने की सीख लेनी चाहिए।

