Monday, January 19, 2026
उत्तराखंड

#ConstitutionAt75: “संविधान लोकतंत्र की आत्मा और सुप्रीम कोर्ट उसका सजग प्रहरी”—न्यायमूर्ति उज्जल भूयान; ग्राफिक एरा में न्याय के ‘जीवंत मार्ग’ पर गहरा मंथन

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने ‘नि:शब्दों को आवाज़’ देने वाले संविधान की महत्ता को रेखांकित किया; छात्रों को दिया सफलता का मंत्र— “आत्मविश्वास एक निरंतर प्रक्रिया है, स्वयं पर संदेह से न डरें।”

 75 वर्षों की यात्रा और न्यायपालिका का संकल्प

देहरादून (18 जनवरी 2026): ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी और ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के ‘स्कूल ऑफ लॉ’ द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में न्यायमूर्ति उज्जल भूयान ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। “भारतीय संविधान के 75 वर्ष” विषय पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारा संविधान केवल पन्नों पर लिखा दस्तावेज नहीं, बल्कि एक परिवर्तनकारी सामाजिक माध्यम है।

1. सर्वोच्च न्यायालय: अधिकारों का कवच

न्यायमूर्ति भूयान ने कहा कि पिछले साढ़े सात दशकों में सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी के जीवन से जुड़े अधिकारों को नई परिभाषा दी है।

  • ऐतिहासिक वाद: उन्होंने केशवानंद भारती, मेनका गांधी और गोलकनाथ जैसे उन ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र किया, जिन्होंने भारतीय लोकतंत्र की दिशा तय की।

  • जनता का भरोसा: उन्होंने जोर देकर कहा कि न्यायपालिका की असली ताकत ‘हथौड़े’ में नहीं, बल्कि ‘जनता के विश्वास’ में निहित है।

“संविधान कोई जड़ दस्तावेज नहीं, बल्कि एक सतत् चलने वाली प्रक्रिया है। इसने समाज के वंचितों को पहचान दी और जो बोल नहीं सकते थे, उन्हें सशक्त आवाज़ दी।” — न्यायमूर्ति उज्जल भूयान

2. भविष्य की चुनौतियां और AI का प्रवेश

बदलते दौर की चुनौतियों पर चर्चा करते हुए न्यायमूर्ति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और न्याय के संतुलन पर अपने विचार रखे।

  • तकनीक का उपयोग: उन्होंने कहा कि एआई को न्याय के मार्ग की बाधा नहीं, बल्कि उसे सुलभ और पारदर्शी बनाने का माध्यम बनाना चाहिए।

  • संघीय ढांचा: केंद्र और राज्यों के बीच संतुलित संबंधों को बनाए रखना भविष्य की बड़ी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी बताया।

3. छात्रों के लिए ‘मानवीय’ संदेश: आत्मविश्वास का विकास

विधि के छात्रों के साथ अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने एक बड़ी मानवीय सीख दी। उन्होंने कहा कि अक्सर छात्र स्वयं पर संदेह करते हैं, जो कि स्वाभाविक है।

  • प्रेरणा: उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि विधि का क्षेत्र असीम अवसरों से भरा है। धैर्य, खुले विचार और निरंतर सीखने की ललक ही एक सफल वकील या न्यायाधीश की पहचान है।

गरिमामयी उपस्थिति और सम्मान

कार्यक्रम का शुभारंभ न्यायमूर्ति द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।

  • अतिथि सत्कार: ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. नरपिंदर सिंह ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया, जबकि ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अमित आर. भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

  • सम्मान: इस दौरान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रेम सिंह खिमाल और मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रिंकी सहानी को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

समारोह में प्रो. चांसलर डॉ. राकेश कुमार शर्मा, प्रो वाइस चांसलर डॉ. संतोष एस. सर्राफ सहित भारी संख्या में शिक्षक और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। के.पी. नौटियाल ऑडिटोरियम में आयोजित इस सत्र का अंत छात्रों की जिज्ञासाओं और न्यायमूर्ति के सधे हुए उत्तरों के साथ हुआ।