Monday, January 12, 2026
हरियाणा

सरहद पार ‘डिजिटल’ साज़िश: सात समंदर पार बैठे गैंगस्टरों का काल बनेगा हरियाणा पुलिस का नया ‘ब्लूप्रिंट’

चंडीगढ़- प्रदेश में संगठित अपराध अब मोहल्ले की गलियों से निकलकर ‘डिजिटल क्लाउड’ और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं तक फैल चुका है। पुलिस मुख्यालय में DGP अजय सिंघल की अध्यक्षता में हुई हालिया समीक्षा बैठक ने एक भयावह सच से पर्दा उठाया है: आपके फोन की स्क्रीन पर दिखने वाला एक ‘अनजान कॉल’ या ‘फेसबुक फ्रेंड’ किसी अंतरराष्ट्रीय गैंग का हिस्सा हो सकता है।

  • इंटरनेशनल रिमोट कंट्रोल: विदेशों में छिपे गैंगस्टर इंटरनेट कॉलिंग और वर्चुअल नंबर्स के जरिए भारत में चला रहे हैं अपना नेटवर्क।
  • युवाओं का ‘डिजिटल शिकार’: सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को लालच देकर बनाया जा रहा है अपराधी।
  • पुलिस का पलटवार: फिरौती के मामलों में 40% की गिरावट; 9 बड़ी हत्याओं की साजिश नाकाम।
  • जीरो टॉलरेंस: विदेश में बैठे अपराधियों को भी अब ‘आतंकवादी’ मानकर होगी कार्रवाई।

वर्चुअल नंबर और फर्जी प्रोफाइल: अपराध का नया हथियार

IG STF सतीश बालन के अनुसार, आज के दौर का अपराधी तकनीकी रूप से बेहद सक्षम है। वे Virtual Numbers का उपयोग करते हैं जिन्हें ट्रैक करना सामान्यतः कठिन होता है। इन नंबरों के जरिए विदेशों में सुरक्षित बैठे सरगना अपने गुर्गों को निर्देश देते हैं।

सबसे चिंताजनक पहलू युवाओं की भर्ती है। सोशल मीडिया पर ‘ग्लैमर’ और ‘पैसे’ का झूठा प्रदर्शन कर युवाओं को छोटे-छोटे कामों के बहाने दलदल में खींचा जाता है। यह सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी को बर्बाद करने की सोची-समझी साजिश है।

आंकड़ों की जुबानी: क्या बदल रही है तस्वीर?

हरियाणा पुलिस की सक्रियता का प्रभाव अब धरातल पर दिखने लगा है। बैठक में साझा किए गए आंकड़े एक सकारात्मक बदलाव की ओर इशारा करते हैं:

विवरण प्रभाव (2024 बनाम 2025)
फिरौती की वारदातें 40% की कमी
टारगेटेड मर्डर साजिशें नाकाम 09 बड़ी सफलताएं
STF की रणनीति विदेशी एजेंसियों के साथ सक्रिय समन्वय

पत्रकार की दृष्टि: समाज के लिए एक साझा जिम्मेदारी (Journalist’s POV)

एक पत्रकार के तौर पर इस पूरे परिदृश्य को देखना डरावना भी है और उम्मीद जगाने वाला भी। डरावना इसलिए, क्योंकि दुश्मन अब अदृश्य है और आपके बच्चे के स्मार्टफोन के जरिए आपके घर तक पहुँच चुका है। उम्मीद इसलिए, क्योंकि पुलिस अब केवल अपराधी को नहीं, बल्कि उस ‘सिस्टम’ को खत्म कर रही है जिससे अपराध पनपता है।

डीजीपी अजय सिंघल का यह बयान कि “अपराधी को आतंकवादी की श्रेणी में रखा जाएगा”, एक कड़ा और आवश्यक संदेश है। लेकिन एक समाज के तौर पर हमें यह समझना होगा कि काउंसलिंग और जागरूकता केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। जब तक अभिभावक अपने बच्चों के डिजिटल व्यवहार को लेकर सतर्क नहीं होंगे, तब तक ये अपराधी अपना जाल फैलाते रहेंगे। हथियार चलाने वाले हाथ से पहले, उस विचार को रोकना जरूरी है जो उसे अपराध की ओर धकेलता है।


कैसे रहें सुरक्षित? (Safety Advisory)

  1. डिजिटल सतर्कता: किसी भी अनजान ‘इंटरनेशनल कॉल’ या संदिग्ध सोशल मीडिया फ्रेंड रिक्वेस्ट से बचें।

  2. काउंसलिंग की भूमिका: यदि कोई युवा अचानक पैसे या व्यवहार में बदलाव दिखाए, तो तुरंत उससे बात करें।

  3. पुलिस का सहयोग: धमकी मिलने पर डरे नहीं, तुरंत एसटीएफ या साइबर सेल को सूचित करें। आपकी चुप्पी अपराधी का सबसे बड़ा हथियार है