Monday, February 16, 2026
उत्तराखंड

देहरादून मर्डर केस: इंसाफ की रफ्तार! युवती की नृशंस हत्या मामले में SIT ने मात्र 72 घंटे में दाखिल की चार्जशीट

35 गवाह और वैज्ञानिक साक्ष्य; SSP देहरादून बोले- ‘Rarest of Rare’ केस में अभियुक्त को फांसी दिलाने के लिए होगी प्रभावी पैरवी

देहरादून: राजधानी देहरादून को झकझोर देने वाले युवती हत्याकांड में देहरादून पुलिस ने न्याय की दिशा में एक मिसाल पेश की है। 02 फरवरी 2026 को हुई इस नृशंस हत्या के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने रिकॉर्ड समय में कार्रवाई करते हुए मात्र तीन दिनों के भीतर अभियुक्त के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र (Charge Sheet) दाखिल कर दिया है।

वैज्ञानिक जांच और साक्ष्यों का मजबूत जाल

घटना की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून ने इसे चुनौती के रूप में लिया था। SIT ने जांच में आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों का सहारा लिया:

  • CCTV और रूट चार्ट: घटनास्थल से लेकर अभियुक्त के भागने के मार्ग तक के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों का बारीकी से विश्लेषण किया गया।

  • फोरेंसिक साक्ष्य: अभियुक्त आकाश के पास से बरामद चापड़, खून से सने कपड़े, जूते और हेलमेट को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है।

  • गवाहों की फेहरिस्त: पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 35 महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए हैं, जो कोर्ट में केस को मजबूती प्रदान करेंगे।

फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी कड़ी पैरवी

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया है कि यह मामला “Rarest of Rare” (विरल से विरलतम) की श्रेणी में आता है। पुलिस का लक्ष्य अभियुक्त को कठोरतम सजा (मृत्युदंड) दिलाना है। इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट में प्रभावी पैरवी की जाएगी ताकि पीड़िता के परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।

“हमारा उद्देश्य अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करना और जनता में विश्वास बहाल करना है। तीन दिन में चार्जशीट दाखिल करना हमारी टीम की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।” — वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, देहरादून

क्या था पूरा मामला?

बीती 2 फरवरी को कोतवाली नगर क्षेत्र में अभियुक्त आकाश (निवासी मन्नूगंज) ने एक युवती की बेरहमी से हत्या कर दी थी। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जिसके बाद वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए SIT का गठन किया गया था।


सम्पादकीय विश्लेषण: क्यों खास है यह कार्रवाई?

अमूमन जघन्य अपराधों में चार्जशीट दाखिल होने में महीनों लग जाते हैं, जिससे साक्ष्य कमजोर होने का खतरा रहता है। लेकिन देहरादून पुलिस द्वारा मात्र 3 दिन में 35 गवाहों के साथ चार्जशीट पेश करना उत्तराखंड पुलिस की कार्यप्रणाली में आए बड़े बदलाव और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का प्रमाण है।