Thursday, February 26, 2026
उत्तराखंड

खौफ के साये में खुटियाखाल: तेंदुए के हमले में पहाड़ की एक और ‘गंगा’ शांत; ग्रामीणों का फूटा गुस्सा— “क्या विभाग को किसी और मौत का इंतजार था?”

नैनीताल के धारी ब्लॉक में दर्दनाक हादसा। जंगल गई महिला को तेंदुए ने बनाया निवाला; पिछले कई दिनों से मिल रही थी आहट, लेकिन वन विभाग की ‘सुस्ती’ पड़ी भारी। प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ाने के दिए निर्देश।

नैनीताल/धारी (11 जनवरी 2026): उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में मानव और वन्यजीव संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार का दिन नैनीताल जनपद के धारी विकासखंड अंतर्गत खुटियाखाल क्षेत्र के लिए काला साबित हुआ। यहाँ एक खूंखार तेंदुए ने घात लगाकर गंगा देवी नामक महिला पर हमला कर दिया। हमला इतना भीषण था कि गंगा देवी को संभलने का मौका तक नहीं मिला और मौके पर ही उनकी जीवनलीला समाप्त हो गई।

दर्दनाक हादसा: जब मौत ने दे दी दस्तक

जानकारी के अनुसार, मृतका गंगा देवी अपने दैनिक कार्यों के लिए निकली थीं, तभी झाड़ियों में छिपे तेंदुए ने अचानक उन पर झपट्टा मार दिया। चीख-पुकार सुनकर जब तक ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तब तक तेंदुआ अपने शिकार को लहूलुहान कर चुका था। इस घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है।

लापरवाही पर आक्रोश: “हमने पहले ही चेताया था”

हादसे के बाद खुटियाखाल में शोक की लहर तो है ही, साथ ही ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में तेंदुए की सक्रियता देखी जा रही थी।

  • चेतावनी को किया नजरअंदाज: ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार वन विभाग को तेंदुए की गतिविधियों की सूचना दी थी।

  • ठोस कदम की कमी: लोगों का आरोप है कि अगर समय रहते वन विभाग गश्त बढ़ा देता या पिंजरा लगा देता, तो आज गंगा देवी जीवित होतीं।

प्रशासनिक मुस्तैदी और सुरक्षा के निर्देश

घटना की सूचना मिलते ही धारी उपजिलाधिकारी (SDM) अंशुल भट्ट और वन विभाग की टीम घटनास्थल के लिए रवाना हुई।

“तेंदुए के हमले में महिला की मौत की पुष्टि हुई है। यह एक अत्यंत दुखद घटना है। प्रशासन और वन विभाग की टीम मौके पर है। हमने क्षेत्र में तत्काल गश्त बढ़ाने और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए पुख्ता इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। पीड़ित परिवार को नियमानुसार मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।” अंशुल भट्ट, उपजिलाधिकारी, धारी

सुलगते सवाल: कब तक असुरक्षित रहेगा पहाड़?

यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि वन्यजीवों के बढ़ते आतंक के बीच पहाड़ के निवासी कब तक अपनी जान हथेली पर रखकर जिएंगे? क्या केवल मुआवजे का मरहम एक परिवार का दर्द कम कर पाएगा?

ग्रामीणों ने अब दोटूक मांग की है कि जब तक आदमखोर तेंदुए को पकड़ा या मारा नहीं जाता, वे चैन से नहीं बैठेंगे।