Tuesday, January 13, 2026
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मकर संक्रांति 2026: सूर्य के उत्तरायण से बदलेगी किस्मत! जानें सटीक पुण्यकाल, महत्व और अपनी राशि के अनुसार ‘महादान’ का विधान

देहरादून: ठिठुरती ठंड के बीच जब सूरज की पहली किरण उत्तरायण की ओर कदम बढ़ाती है, तो वह अपने साथ केवल गर्माहट ही नहीं, बल्कि नई उम्मीदें और समृद्धि का संदेश भी लाती है। 14 जनवरी 2026 को मनाया जाने वाला ‘मकर संक्रांति’ का यह महापर्व हमारे जीवन में अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक है। आइए जानते हैं इस वर्ष के शुभ मुहूर्त, आध्यात्मिक महत्व और वह एक विशेष दान जो आपकी राशि के अनुसार आपके जीवन में खुशहाली ला सकता है।


मकर संक्रांति का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य देव अपने पुत्र शनि के घर (मकर राशि) में प्रवेश करते हैं। यह पिता-पुत्र के मिलन और कटुता के अंत का प्रतीक है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो इस दिन से दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं, जिसे ‘देवताओं का दिन’ यानी उत्तरायण कहा जाता है।

भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग नामों से मनाया जाता है— उत्तर भारत में खिचड़ी, दक्षिण में पोंगल, गुजरात में उत्तरायण और असम में बिहू। नाम भले अलग हों, लेकिन ‘साझा करने और आभार प्रकट करने’ की भावना हर जगह एक है।


2026 में पुण्यकाल और महामुहूर्त

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, संक्रांति का पुण्यकाल वह समय होता है जब किया गया दान और पवित्र नदियों में स्नान अक्षय फल प्रदान करता है।

  • संक्रांति तिथि: 14 जनवरी, 2026

  • पुण्यकाल मुहूर्त: प्रातः 07:15 बजे से सायं 05:45 बजे तक

  • महापुण्यकाल: प्रातः 07:15 बजे से प्रातः 09:00 बजे तक (यह समय साधना और विशेष दान के लिए सर्वश्रेष्ठ है)


राशि अनुसार दान का विधान: क्या दें कि चमक जाए किस्मत?

मकर संक्रांति पर ‘दान’ का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, यदि अपनी राशि के स्वामी ग्रह के अनुकूल वस्तुओं का दान किया जाए, तो ग्रहों के दोष शांत होते हैं और वर्षभर सुख-शांति बनी रहती है।

राशि

क्या दान करें?

लाभ

मेष गुड़, तिल और मसूर की दाल साहस और करियर में उन्नति
वृषभ सफेद तिल, चीनी और चावल सुख-समृद्धि और पारिवारिक शांति
मिथुन मूंग की दाल, कंबल और तिल बौद्धिक क्षमता और व्यापार में लाभ
कर्क चावल, दूध और चांदी (या सफेद तिल) मानसिक शांति और स्वास्थ्य
सिंह तांबा, गुड़ और गेंहू मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा
कन्या हरे वस्त्र, मूंग और खिचड़ी अटके हुए कार्यों में सफलता
तुला रूई, सफेद वस्त्र और मिश्री रिश्तों में मधुरता और विलासिता
वृश्चिक गुड़, कंबल और लाल वस्त्र शत्रु बाधा से मुक्ति और ऊर्जा
धनु हल्दी, चने की दाल और पीले वस्त्र भाग्य का साथ और ज्ञान वृद्धि
मकर काली उड़द, तेल और काला कंबल शनि देव की कृपा और कष्टों का अंत
कुंभ काला तिल, तेल और ऊनी वस्त्र आर्थिक मजबूती और स्थिरता
मीन शहद, चने की दाल और पीला अनाज आध्यात्मिक शांति और लाभ

खिचड़ी और तिल-गुड़: स्वाद के पीछे छिपा सेहत का राज

इस दिन खिचड़ी खाने और तिल-गुड़ के सेवन का गहरा मानवीय और वैज्ञानिक पहलू है। तिल और गुड़ शरीर को सर्दियों में आवश्यक गर्मी प्रदान करते हैं, जबकि खिचड़ी सुपाच्य होती है और अनाज के प्रति हमारे सम्मान को दर्शाती है। जैसा कि महाराष्ट्र में कहा जाता है— “तिल-गुड़ घ्या और गोड़-गोड़ बोला” (तिल-गुड़ खाएं और मीठा बोलें)—यह पर्व कड़वाहट भूलकर रिश्तों में मिठास घोलने का है।


एक मानवीय अपील: असली संक्रांति कहाँ है?

आज के दौर में जब हम डिजिटल युग में जी रहे हैं, मकर संक्रांति हमें अपनी जड़ों से जुड़ने का मौका देती है। इस वर्ष दान केवल मंदिर की चौखट तक सीमित न रखें; अपने आस-पास के किसी जरूरतमंद को गर्म कपड़े दें, बेसहारा पशुओं के लिए चारे का प्रबंध करें या किसी भूखे को खिचड़ी खिलाएं। मानवता की सेवा ही सूर्य देव की सच्ची आराधना है।