पंजाब का ‘शहरी मास्टरस्ट्रोक’: भगवंत मान सरकार ने संजीव अरोड़ा को सौंपी निकाय विभाग की कमान; 32% वोट बैंक और उद्योग जगत को साधने की बड़ी तैयारी
खत्री-अरोड़ा समाज के कद्दावर चेहरे संजीव अरोड़ा बनेंगे शहरों के ‘विकास पुरुष’। लुधियाना से लेकर अमृतसर तक व्यापारियों और मिडिल क्लास के बीच पैठ मजबूत करेगी ‘आप’; निकाय चुनावों के अनुभवों से लिया बड़ा सबक।
चंडीगढ़/लुधियाना: पंजाब की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने आगामी राजनीतिक सफर के लिए ‘अर्बन एजेंडा’ सेट कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने लुधियाना से विधायक और प्रमुख उद्योगपति संजीव अरोड़ा को नया स्थानीय निकाय मंत्री नियुक्त कर यह साफ कर दिया है कि अब पार्टी का मुख्य फोकस पंजाब के शहरों, वहां के व्यापारियों और मध्यम वर्ग पर है।
संजीव अरोड़ा ही क्यों? (प्रोफाइल और प्रभाव)
संजीव अरोड़ा केवल एक विधायक नहीं, बल्कि व्यापारिक जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। लुधियाना जैसे ‘पंजाब के मैनचेस्टर’ से आने के कारण उनकी पकड़ उद्योग और व्यापार की बारीकियों पर मजबूत है।
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सामाजिक समीकरण: पंजाब के शहरों में करीब 20% अरोड़ा और 12% खत्री मतदाता हैं। कुल 32% की यह हिस्सेदारी चुनाव परिणामों को पलटने की ताकत रखती है।
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सेंधमारी में माहिर: उपचुनावों के दौरान अरोड़ा ने न केवल ‘आप’ का आधार मजबूत किया, बल्कि पारंपरिक रूप से कांग्रेस और भाजपा के गढ़ माने जाने वाले शहरी वोट बैंक में भी गहरी सेंध लगाई।
निकाय विभाग: जनता से सीधा जुड़ाव
स्थानीय निकाय विभाग (Local Bodies) सरकार का वह चेहरा है जिससे आम शहरी मतदाता का हर दिन पाला पड़ता है। संजीव अरोड़ा के कंधों पर अब उन मुद्दों की जिम्मेदारी है जो सीधे मिडिल क्लास को प्रभावित करते हैं:
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ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: बिल्डिंग प्लान, एनओसी (NOC) और लाइसेंसिंग की प्रक्रिया को सरल बनाना।
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बुनियादी ढांचा: सड़कों का जाल, सीवरेज सिस्टम और पेयजल आपूर्ति में सुधार।
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आर्थिक राहत: प्रॉपर्टी टैक्स और कमर्शियल एरिया से जुड़े फैसलों में पारदर्शिता।
पुराने अनुभवों से लिया सबक
पार्टी सूत्रों का मानना है कि पिछले निकाय चुनावों में 961 में से 522 वार्डों पर जीत ‘आप’ के कद के अनुरूप नहीं थी। जालंधर, लुधियाना और अमृतसर जैसे बड़े नगर निगमों में जनता की राय सीधे तौर पर निगम की कार्यशैली से तय होती है। ऐसे में अरोड़ा जैसी ‘प्रशासनिक दक्षता’ वाले नेता को आगे कर ‘आप’ ने भाजपा और कांग्रेस के शहरी विमर्श को चुनौती दे दी है।
मानवीय दृष्टिकोण: “शहरों की समस्याओं का होगा समाधान”
संजीव अरोड़ा की नियुक्ति को लेकर व्यापारियों में भी उत्साह है। उनका मानना है कि एक उद्योगपति के हाथ में विभाग होने से इंस्पेक्टर राज से मुक्ति मिलेगी और फाइलों के मकड़जाल में फंसे शहरी विकास को नई रफ्तार मिलेगी।

