Saturday, August 8, 2026
उत्तराखंड

देहरादून में पुल की एप्रोच रोड धंसने पर शासन का बड़ा चाबुक: EE, AE और JE समेत PWD के तीन बड़े अधिकारी निलंबित

टोंस नदी के उफान और लापरवाही ने खोली लोक निर्माण विभाग की पोल; डिजाइन कंसलटेंट पर भी गाज गिरनी तय, जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

देहरादून। राजधानी देहरादून के नंदा की चौकी (प्रेमनगर) स्थित टोंस नदी पर बने पुल की एप्रोच रोड अचानक धंसने के मामले में शासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। प्राथमिक जांच में गंभीर लापरवाही, घटिया गुणवत्ता नियंत्रण और पर्यवेक्षण में भारी ढिलाई पाए जाने पर लोक निर्माण विभाग (लोनिवि/PWD) प्रांतीय खंड के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

इस कड़ी कार्रवाई से विभागीय महकमे में हड़कंप मच गया है।

इन तीन अधिकारियों पर गिरी गाज

लोनिवि सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, निलंबित किए गए अधिकारियों में शामिल हैं:

  • राजेश कुमार (अधिशासी अभियंता / Executive Engineer)

  • अमित त्यागी (सहायक अभियंता / Assistant Engineer)

  • नवीन गैरोला (कनिष्ठ अभियंता / Junior Engineer)

शासन ने तीनों अधिकारियों पर तकनीकी निगरानी में लापरवाही, गुणवत्ता नियंत्रण में चूक और अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने के आरोप में दीर्घ शास्ति (बड़ी विभागीय जांच) की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।

जांच रिपोर्ट में हुआ खुलासा: आखिर क्यों धंसी रोड?

बीती 28 जुलाई को टोंस नदी पर बने इस महत्वपूर्ण पुल की एप्रोच रोड अचानक धंस गई थी, जिससे हजारों राहगीरों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा था।

मुख्य अभियंता द्वारा 3 अगस्त को सौंपी गई जांच रिपोर्ट में सामने आया कि:

  1. रिवर ट्रेनिंग वर्क की कमी: नदी के तेज बहाव को मोड़ने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम (‘River Training Work’) नहीं किए गए थे।

  2. एकतरफा कटाव: सही तकनीकी प्रबंधन न होने के कारण नदी का पूरा दबाव एक ही तरफ आ गया, जिससे कटाव हुआ और सड़क धंस गई।

डिजाइन कंसलटेंट पर भी होगी सख्त कार्रवाई

शासन ने केवल अधिकारियों पर ही गाज नहीं गिराई है, बल्कि लोनिवि विभागाध्यक्ष को मामले से जुड़े डिजाइन कंसलटेंट (Design Consultant) के खिलाफ भी कड़ी कानूनी व प्रशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही, भविष्य में ऐसी किसी दुर्घटना को रोकने और टोंस नदी पुल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध (Time-bound) कार्ययोजना तैयार कर तुरंत धरातल पर काम शुरू करने का आदेश दिया गया है।