Saturday, August 8, 2026
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महिला आरक्षण कानून पर फिर गरमाई सियासत: राहुल गांधी का सरकार से सवाल—’लागू करने में देरी क्यों, परिसीमन से जोड़ना कितना जायज?’

किरेन रिजिजू के बयान पर कांग्रेस का पलटवार; राहुल बोले—’नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को बिना शर्त और तुरंत किया जाए लागू

नई दिल्ली। देश में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को लेकर पारित हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) को लागू करने की समयसीमा पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच सियासी तकरार एक बार फिर तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान पर पलटवार करते हुए सरकार की नीयत पर सवाल उठाए हैं।

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस इस कानून का समर्थन पहले ही कर चुकी है, इसलिए इसे लागू करने में किसी भी नई शर्त या परिसीमन (Delimitation) के बहाने देरी नहीं होनी चाहिए।

राहुल गांधी का सरकार पर सीधा हमला: ‘बिना शर्त लागू हो आरक्षण’

शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी बात रखते हुए राहुल गांधी ने कहा:

“‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ संसद में कांग्रेस पार्टी के पूर्ण समर्थन से पारित हुआ था। महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए किसी नई शर्त या जटिल प्रक्रिया की जरूरत नहीं है। सरकार इसे बिना किसी शर्त के तुरंत लागू करे।”

इससे पहले राहुल गांधी ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक वीडियो संदेश जारी किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि देश का विकास महिलाओं की मजबूत आवाज और सीधी हिस्सेदारी के बिना अधूरा है।

विवाद की वजह: किरेन रिजिजू का बयान और कांग्रेस की आपत्ति

इस ताजा सियासी घमासान की शुरुआत केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के उस बयान से हुई, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी के वीडियो संदेश को कांग्रेस का ‘सकारात्मक रुख’ बताया था। रिजिजू ने चुनौती दी थी कि यदि कांग्रेस वाकई गंभीर है, तो उसे महिला आरक्षण कानून का बिना शर्त समर्थन करना चाहिए।

आखिर कांग्रेस और विपक्ष को आपत्ति किस बात पर है?

  • परिसीमन से लिंक करना: कानून के प्रावधानों के मुताबिक, महिला आरक्षण को आगामी लोकसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ा गया है।

  • विपक्ष की मांग: कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों की दलील है कि महिलाओं को 33% आरक्षण देने की प्रक्रिया को जनगणना और परिसीमन से अलग रखकर तुरंत प्रभाव से लागू किया जाए।

क्या है ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’?

वर्ष 2023 में संसद के दोनों सदनों से पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत संसद (लोकसभा) और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत (एक तिहाई) सीटें आरक्षित करने का ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है।

हालांकि, इसके प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर संवैधानिक प्रक्रियाओं और परिसीमन की शर्त के कारण क्रियान्वयन में समय लग रहा है। 17 अप्रैल को भी लोकसभा में संविधान संशोधन से जुड़े एक विधेयक पर जरूरी दो-तिहाई बहुमत की प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण आगे की राह पर बहस जारी है।

क्यों अहम है यह बहस?

महिला आरक्षण कानून भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका तय करने वाला एक ऐतिहासिक कदम है। लेकिन इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने के कारण जमीनी स्तर पर इसका लाभ कब तक मिलेगा, इस पर संशय बना हुआ है। राहुल गांधी और केंद्र के बीच का यह ताजा विवाद आने वाले चुनावों में महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और जेंडर इक्विटी (Gender Equity) को एक बार फिर सबसे बड़ा मुद्दा बना सकता है।