सचिवालय में गूंजा राष्ट्रभक्ति का स्वर: मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने स्वतंत्रता दिवस पर सुशासन, विकसित उत्तराखंड और हिमालय संरक्षण का लिया संकल्प
उत्तराखंड की 25 वर्षों की यात्रा का आत्मावलोकन जरूरी; पलायन, रोजगार और आपदा प्रबंधन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर कार्य करने पर दिया जोर
देहरादून। देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर उत्तराखंड सचिवालय परिसर में गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने ध्वजारोहण कर प्रदेशवासियों, सचिवालय परिवार, पुलिस व पीएसी के जवानों तथा स्कूली बच्चों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। मुख्य सचिव ने राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीदों और स्वतंत्रता सेनानियों को नमन करते हुए देश के निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान को याद किया।
मुख्य सचिव ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्रता दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि असंख्य वीरों के त्याग और तपस्या को स्मरण करने का दिन है। उन्होंने रेखांकित किया कि स्वतंत्रता हमें विरासत में मिली है, लेकिन समृद्ध और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करना वर्तमान पीढ़ी का परम दायित्व है।
“आत्मविश्वास से भरा है आज का भारत, अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे विकास का लाभ”
मुख्य सचिव ने कहा कि भारत आज आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी और सामरिक क्षेत्रों में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। अंतरिक्ष विज्ञान में नई ऊंचाइयां छूने से लेकर डिजिटल तकनीक द्वारा पारदर्शी सुशासन की स्थापना तक, भारत का सामर्थ्य विश्व स्तर पर सिद्ध हो रहा है।
“हमारा मुख्य लक्ष्य ऐसा समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित करना है, जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और हर नागरिक को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।” — आनंद बर्द्धन, मुख्य सचिव (उत्तराखंड)
उत्तराखंड के 25 वर्ष: उपलब्धियों के साथ-साथ चुनौतियों पर भी ध्यान देना आवश्यक
राज्य गठन के 25 वर्षों के सफर पर प्रकाश डालते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि यह समय आत्मावलोकन करने और भविष्य की दिशा तय करने का है। उत्तराखंड का गठन केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं था, बल्कि पर्वतीय क्षेत्र की विशिष्ट भौगोलिक, सांस्कृतिक परिस्थितियों और विकास की आकांक्षाओं के लंबे संघर्ष का परिणाम था।
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उपलब्धियां: 25 वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पर्यटन, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार हुआ है।
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प्रमुख चुनौतियां: पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकना, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसरों का सृजन, दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य-शिक्षा की पहुंच, जल स्रोतों का संरक्षण, प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम कम करना और संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी (Ecology) की रक्षा करना।
मुख्य सचिव ने आह्वान किया कि इन चुनौतियों का समाधान करने और विकसित उत्तराखंड के सपने को साकार करने के लिए शासन, प्रशासन और नागरिकों को एकजुट होकर काम करना होगा।
हिमालयी राज्य के लिए दूरदर्शी विज़न
मुख्य सचिव का संबोधन केवल औपचारिक संदेश नहीं, बल्कि उत्तराखंड के आगामी 25 वर्षों के रोडमैप का संकेत है। पर्यावरण संरक्षण (हिमालयन इकोसिस्टम) और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाना ही राज्य के सतत विकास का मूल आधार है।

