Thursday, October 22, 2026
उत्तराखंड

उत्तराखंड के मान्यता प्राप्त मदरसों में अब शुक्रवार की जगह रहेगा रविवार को साप्ताहिक अवकाश, सरकार का बड़ा कदम

मदरसा बोर्ड की जगह लागू हुआ अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड; नियम तोड़ने वाले 250 अवैध मदरसे पहले चरण में हुए सील, CM धामी बोले— “सभी बच्चों को मिले गुणवत्तापूर्ण शिक्षा”

देहरादून। उत्तराखंड में मदरसों की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचे को मुख्यधारा की नियमित स्कूली शिक्षा के दायरे में लाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा और नीतिगत फैसला लिया है। अब शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त मदरसों में शुक्रवार के स्थान पर रविवार को साप्ताहिक अवकाश रहेगा।

अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के अनुसार, जिन पंजीकृत मदरसों को स्कूल के रूप में मान्यता प्रदान की गई है, उन्हें अन्य सामान्य विद्यालयों की भांति शिक्षा विभाग और प्राधिकरण के सभी निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

मदरसा बोर्ड के स्थान पर अब ‘अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड’

राज्य सरकार ने पारंपरिक मदरसा बोर्ड की व्यवस्था में बदलाव करते हुए अब ‘अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड’ की व्यवस्था लागू कर दी है। इस नए दायरे में केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि सिख, पारसी, जैन और बौद्ध समुदायों के शिक्षण संस्थानों को भी शामिल किया गया है।

  • मान्यता की स्थिति: पूर्व में मदरसा बोर्ड के तहत कुल 452 संस्थान पंजीकृत थे। नए नियमों के तहत दोबारा आवेदन करने वाले संस्थानों में से अब तक 76 संस्थानों को स्कूल के रूप में मान्यता दी जा चुकी है, जबकि 114 आवेदन अभी प्रक्रियाधीन हैं।

  • जिलेवार स्थिति: अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी के मुताबिक, देहरादून में 6, हरिद्वार में 44, नैनीताल में 2 और ऊधम सिंह नगर में 24 संस्थानों सहित कुल 76 संस्थानों को विधिवत मान्यता मिल चुकी है।

पहले चरण में 250 अवैध मदरसे किए गए सील

अल्पसंख्यक विभाग के सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी करने वाले संस्थानों के खिलाफ प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है।

“कारवाही के पहले चरण में 250 ऐसे अवैध मदरसों को सील किया गया है, जो किसी भी बोर्ड में पंजीकृत नहीं थे। इन संस्थानों में अन्य राज्यों से बच्चों को लाकर पढ़ाने जैसी बातें भी सामने आई थीं। बिना मान्यता के किसी भी संस्थान का संचालन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

— डॉ. पराग मधुकर धकाते, सचिव (अल्पसंख्यक विभाग)

“समान नियम और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सरकार की प्राथमिकता”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पूरी प्रक्रिया पर जोर देते हुए कहा कि सरकार का मूल उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को एक समान और गुणवत्तापूर्ण आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिकता, तय पाठ्यक्रम और पारदर्शी व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले किसी भी शिक्षण संस्थान को संचालित नहीं होने दिया जाएगा। साप्ताहिक अवकाश को रविवार करने के पीछे सरकार का तर्क है कि स्कूल के रूप में मान्यता प्राप्त हर संस्थान पर एक जैसे नियम लागू होने चाहिए।