Thursday, October 29, 2026
उत्तराखंड

सख्त भू-कानून से जमीनों की अनियंत्रित खरीद-फरोख्त पर लगेगी लगाम: गैरसैंण में बोले CM पुष्कर सिंह धामी

मूल संस्कृति, जनसांख्यिकी और स्थानीय अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध सरकार; 250 से अधिक अवैध मदरसों पर कार्रवाई का दिया ब्योरा

देहरादून/गैरसैंण। उत्तराखंड की पवित्र भूमि, सांस्कृतिक पहचान और जनसांख्यिकीय संतुलन (Demographic Balance) को बनाए रखने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा संदेश दिया है। ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में लागू किए जा रहे सख्त भू-कानून (Strict Land Laws) पर सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए इसे राज्य के भविष्य की सुरक्षा के लिए एक ऐतिहासिक कदम करार दिया।

मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राज्य में जमीनों के जरिए अवैध रूप से लैंड बैंक तैयार किए जाने और उनके व्यावसायिक दुरुपयोग की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए सरकार ने कड़े कानून लागू किए हैं, ताकि देवभूमि के प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय निवासियों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

“उत्तराखंड की मूल संस्कृति और जनसांख्यिकी से खिलवाड़ मंजूर नहीं”

मुख्यमंत्री धामी ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि एक विशिष्ट सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर है।

  • सांस्कृतिक संरक्षण: प्रदेश में जमीनों की अनियंत्रित खरीद-फरोख्त पर रोक लगाकर स्थानीय मूल संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखा जाएगा।

  • लैंड बैंक पर अंकुश: बाहरी व्यक्तियों या संस्थाओं द्वारा अनुचित तरीके से जमीनों पर कब्जा कर लैंड बैंक बनाने की कोशिशों को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

  • कानून का राज: मुख्यमंत्री ने बताया कि नियमों का उल्लंघन कर संचालित किए जा रहे 250 से अधिक अवैध मदरसों को बंद (Seal) करने की ठोस प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।

“देवभूमि उत्तराखंड के मूल स्वरूप, सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय हितों की रक्षा करना हमारी सरकार का सबसे पहला संकल्प है। हम कानून के दायरे में रहकर प्रदेश की जनसांख्यिकी और जमीनों के संरक्षण के लिए हर जरूरी और कड़ा कदम उठाते रहेंगे।”

— पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

मदरसा बोर्ड अधिनियम पर कांग्रेस के कार्यकाल का उल्लेख

अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था में किए गए सुधारों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री धामी ने वर्ष 2016 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लागू किए गए मदरसा बोर्ड अधिनियम का जिक्र किया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में केवल एक विशेष समुदाय तक ही दायरा सीमित रखा गया था, जबकि वर्तमान राज्य सरकार ने ‘अल्पसंख्यक शिक्षा बोर्ड’ का गठन कर बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों को भी इसके दायरे में शामिल किया है। इस नई समावेशी नीति से सभी अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों को समान अवसर और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।