उत्तराखंड में कुदरत का कहर: उफान पर गंगा और अलकनंदा, 132 सड़कें ठप; 5 जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट
ऋषिकेश का त्रिवेणी घाट जलमग्न, खतरे के निशान के पास बह रही नदियां; मुख्य सचिव ने डैम से पानी छोड़ने को लेकर जारी किए सख्त निर्देश
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ों से लेकर मैदानों तक लगातार हो रही अतिवृष्टि के कारण राज्य की प्रमुख नदियां रौद्र रूप धारण कर चुकी हैं। मौसम विभाग ने आज (7 अगस्त) देहरादून, उत्तरकाशी, टिहरी, रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में आकाशीय बिजली चमकने और गिरने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है।
नदियों का रौद्र रूप: ऋषिकेश में गंगा का जलस्तर बढ़ा, स्कूल बंद
पहाड़ों में हो रही तेज बारिश के कारण गंगा, अलकनंदा, मंदाकिनी, काली और सरयू नदियां उफान पर हैं:
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जलमग्न हुए घाट: ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है। ऋषिकेश का सुप्रसिद्ध त्रिवेणी घाट और परमार्थ निकेतन का आरती स्थल जलमग्न हो गया है।
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सुरक्षा कदम: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ऋषिकेश में गंगा तट के पास स्थित सभी स्कूलों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। प्रशासन लाउडस्पीकर के माध्यम से तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की हिदायत दे रहा है।
132 सड़कें बंद, चारधाम यात्रा और कांवड़ मार्ग प्रभावित
पहाड़ी ढलानों पर भूस्खलन और मलबे के आने से राज्य का यातायात नेटवर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है:
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हाइवे ठप: प्रदेश भर में 4 नेशनल हाईवे और 4 स्टेट हाईवे समेत कुल 132 संपर्क मार्ग पूरी तरह से बंद पड़े हैं।
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गंगोत्री-यमुनोत्री पर संकट: गंगोत्री और यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर बार-बार भारी मलबा और बोल्डर गिरने से चारधाम यात्रियों और कांवड़ियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोनिवि (PWD) की टीमें जेसीबी और पोकलैंड मशीनों के साथ रास्ते साफ करने में जुटी हैं।
मुख्य सचिव का निर्देश: डैम से पानी छोड़ने से पहले दें तत्काल अलर्ट
हालात की समीक्षा के लिए मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) में उच्चस्तरीय बैठक ली।
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अग्रिम चेतावनी: मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी डैम या बैराज से पानी छोड़ने से पहले निचले इलाकों और पड़ोसी राज्यों को तत्काल सूचित किया जाए।
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स्थलीय निरीक्षण: संवेदनशील क्षेत्रों में जिलाधिकारियों (DMs) को खुद मौके पर जाकर निरीक्षण करने और चारधाम यात्रियों की सुरक्षा पुख्ता करने के आदेश दिए गए हैं।
मौसम की स्थिति और जनता के लिए सलाह
बारिश के कारण तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे मैदानी इलाकों में भी मौसम ठंडा हो गया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने यात्रियों और पर्यटकों से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही संवेदनशील मार्गों पर यात्रा करें और मौसम के अपडेट पर नजर बनाए रखें।

