Tuesday, June 18, 2024
उत्तराखंडदेहरादून

सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों की याचिका खारिज कर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर लगाई मुहर

देहरादून: सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के विशेष याचिका को निरस्त कर दिया। बता दें कि इससे पहले नैनीताल हाईकोर्ट ने भी विधानसभा कर्मचारियों को बर्खास्त करने के विधानसभा सचिवालय के आदेश को सही ठहराया था। बर्खास्त कर्मचारियों की ओर से दायर विशेष अनुग्रह याचिका (एसएलपी) को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। इससे बर्खास्त कर्मचारियों को झटका लगा है।

इस फैसले से बर्खास्त कर्मियों को भारी झटका लगा है। कुछ समय पूर्व भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इन बर्खास्त कर्मियों के केस लड़ने की बात कही थी। उत्तराखंड विधानसभा में नियमों के विरोध तदर्थ नियुक्तियों के संबंध में आज उच्चतम न्यायालय ने पुनः उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण के फैसले को सही ठहराते हुए बर्खास्त कर्मचारियों द्वारा दाखिल याचिका (SLP) को मात्र डेढ़ मिनट की सुनवाई में निरस्त कर दिया।

उत्तराखंड विधानसभा सचिवालय की ओर से पैरवी कर रहे वकील अमित तिवारी ने बताया कि वर्ष 2021 में विधानसभा में तदर्थ रूप से नियुक्त हुए 72 कर्मचारियों द्वारा दाखिल की गई याचिका (एसएलपी) को आज उच्चतम न्यायालय की डबल बेंच के न्यायधीश हृषिकेश रॉय और न्यायधीश मनोज मिश्रा द्वारा सुना गया जिसमे डबल बेंच ने मात्र डेढ़ मिनट में ही याचिकाकर्ताओं की याचिका को निरस्त कर दिया और उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी भूषण के द्वारा लिए गए फैसले को सही ठहराया।

आपको बता दे की विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने नियम विरूद्ध तदर्थ नियुक्तियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया था। जिसमें 2016 से 2021 में तदर्थ आधार पर नियुक्त 228 कर्मचारियों की विशेषज्ञ जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सेवाएं समाप्त की गई। भविष्य में विधानसभा सचिवालय में होने वाली नियुक्तियां नियम व पारदर्शिता हो इसके लिए स्पीकर ने नियमावली में संशोधन की पहल की थी। उत्तराखंड विधानसभा अब सीधी भर्ती के सभी खाली पदों को उत्तराखंड राज्य लोक सेवा आयोग और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से भरेगी। इस संशोधन के साथ शासन ने सेवा नियमावली पर सहमति जताते हुए इसे विधानसभा को लौटा दिया है। संशोधित नियमावली में विधायी को फिर से विधानसभा का प्रशासकीय विभाग बनाने का प्रावधान किया गया है। उच्चतम न्यायालय में विधानसभा सचिवालय उत्तराखंड की ओर से वकील अमित तिवारी और वकील अर्जुन गर्ग ने पैरवी की।

कोटिया समिति की रिपोर्ट के आधार पर 2016 के बाद की गई लगभग 250 कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया था। इस मुद्दे पर पूर्व विधानसभाध्यक्ष प्रेमचन्द अग्रवाल व गोविन्द सिंह कुंजवाल भी निशाने पर आए। बर्खास्तगी के विरोध में कर्मियों ने लंबा आंदोलन भी चलाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *