नशे के अवैध नेटवर्क पर करारा प्रहार: देहरादून में ड्रग्स तस्करों पर कसेगा शिकंजा, स्कूल-कॉलेजों में चलेगा टेस्टिंग अभियान
जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में हुई नारकोटिक्स समिति की बैठक; भांग-अफीम की अवैध खेती मिलने पर पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी होंगे सीधे जिम्मेदार
देहरादून। देवभूमि को नशामुक्त बनाने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को और अधिक सख्त कर दिया है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्तरीय नारकोटिक्स कोऑर्डिनेशन समिति की बैठक में नशे की मांग और आपूर्ति दोनों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए कई कड़े और ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।
ड्रग्स टेस्टिंग के क्षेत्र में संसाधनों को बढ़ाते हुए जिलाधिकारी ने मौके पर ही दो नई सलाइवा-बेस्ड टेस्टिंग मशीनों की खरीद के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है, ताकि शिक्षण संस्थानों में औचक जांच तेजी से की जा सके।
स्कूल-कॉलेजों में चलेगा जागरूकता और ड्रग्स टेस्टिंग अभियान
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राएं अक्सर तस्करों के आसान निशाने पर होते हैं। इसलिए स्कूलों और कॉलेजों में व्यापक स्तर पर नशा विरोधी जागरूकता अभियान चलाए जाएं:
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नियमित टेस्टिंग: शिक्षण संस्थानों में रैंडम सैंपलिंग के तहत ड्रग्स टेस्ट किए जाएंगे।
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मासिक शपथ: हर शिक्षण संस्थान में महीने में कम से कम एक दिन निर्धारित कर छात्र-छात्राओं को नशामुक्ति की शपथ दिलाई जाएगी।
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काउंसिलिंग और फीडबैक: उपजिलाधिकारियों को संबंधित थाना प्रभारियों के साथ मिलकर नशामुक्ति केंद्रों, स्कूलों और मलिन बस्तियों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि नशे के दलदल में फंसे युवाओं की काउंसलिंग कर मुख्य तस्करों तक पहुंचा जा सके।
“युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने वाला व्यक्ति उनका हितैषी नहीं, बल्कि उनके भविष्य का अपराधी है। नशे के अवैध कारोबार को जड़ से समाप्त करने के लिए सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक सख्ती दोनों बेहद जरूरी हैं।”
— डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी देहरादून
अवैध खेती मिलने पर पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी नपेंगे
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में मादक पदार्थों की खेती पर नकेल कसने के लिए प्रशासन ने जवाबदेही तय कर दी है। हाल ही में कल्याणपुरी क्षेत्र में भांग की खेती मिलने पर आबकारी विभाग द्वारा उसे नष्ट कराया गया था, जिस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए डीएम ने संबंधित क्षेत्र के पटवारी और ग्राम विकास अधिकारी (VDO) से स्पष्टीकरण तलब किया है।
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी क्षेत्र में भांग, अफीम, गांजा या चरस की अवैध खेती अथवा कारोबार पाया जाता है, तो इसके लिए सीधे तौर पर स्थानीय कार्मिकों और अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
एनडीपीएस एक्ट के तहत ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी
बैठक में पुलिस और प्रशासन के अब तक के आंकड़ों की समीक्षा भी की गई:
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एनडीपीएस कार्रवाई: सितंबर 2026 तक जिले में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत 244 मुकदमे दर्ज किए गए, जिनमें 281 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।
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वाणिज्यिक मात्रा: कमर्शियल क्वांटिटी से जुड़े 15 मामलों में 23 तस्कर सलाखों के पीछे भेजे गए।
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मेडिकल स्टोरों पर शिकंजा: छापेमारी के दौरान 8 संदिग्ध दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, जबकि नियमों का उल्लंघन करने पर एक मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त किया गया है। सभी मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
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हेल्पलाइन प्रचार: आम जनता को जागरूक करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 1933 के पंपलेट और पोस्टर सार्वजनिक स्थलों व स्कूलों में चस्पा किए जा रहे हैं।

