Thursday, August 6, 2026
उत्तराखंड

सौड़ा सरौली में सुरक्षा दीवारें तैयार, सोंग नदी के तांडव से तबाह कलिंगा नहर बहाल: मालदेवता के किसानों को मिली बड़ी राहत

सीएम धामी के निर्देशों पर युद्धस्तर पर चला पुनर्निर्माण अभियान; सोंग नदी के चौनलाइजेशन से सुरक्षित हुए आपदा प्रभावित गांव

देहरादून। मानसून के दौरान आपदा का दंश झेलने वाले मालदेवता और सौड़ा सरौली क्षेत्र के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सतत मार्गदर्शन और जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की देखरेख में चलाए गए पुनर्निर्माण अभियानों के सुखद परिणाम दिखने लगे हैं। सोंग नदी में आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई ऐतिहासिक कलिंगा नहर का पुनर्निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जिससे क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी फिर से पहुँचने लगा है।

युद्धस्तर पर तैयार हुईं सुरक्षा दीवारें और सड़कें

अतिवृष्टि और भूकटाव से प्रभावित हुए सौड़ा सरौली और आसपास के संवेदनशील इलाकों में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों ने दिन-रात एक कर बुनियादी ढांचे को बहाल किया है:

  • सड़कों का पुनर्स्थापन: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) और लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा आपदा से क्षतिग्रस्त हुई मुख्य सड़कों और पहुंच मार्गों को ठीक कर यातायात को पूर्णतः सुरक्षित और सुचारु बना दिया गया है।

  • मजबूत सुरक्षा कवच: नदी के किनारे बसे गांवों को भविष्य के खतरों से बचाने के लिए पुख्ता सुरक्षा दीवारों और वायर क्रेट (तारों के जाल) का निर्माण अंतिम चरण में है।

सोंग नदी का चौनलाइजेशन: थमेगा तबाही का दौर

लगातार हो रही बारिश को देखते हुए सोंग नदी के प्रचंड बहाव को नियंत्रित करने के लिए पोकलैंड और जेसीबी मशीनों के जरिए नदी का चौनलाइजेशन (Channelization) किया जा रहा है। नदी के प्राकृतिक प्रवाह को सही दिशा देने से आसपास की कृषि भूमि और रिहाइशी इलाकों पर मंडरा रहा भूकटाव का खतरा काफी हद तक कम हो गया है।

“आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा मजबूत करना और आम जनजीवन को सामान्य बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पीएमजीएसवाई, लोनिवि और सिंचाई विभाग के तालमेल से कलिंगा नहर और सुरक्षा दीवारों का काम पूरा कर लिया गया है, जिससे किसानों और स्थानीय नागरिकों को बड़ी सहूलियत मिली है।”के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (देहरादून)

क्यों अहम है कलिंगा नहर की बहाली?

मालदेवता और रायपुर घाटी के दर्जनों गांवों की कृषि अर्थव्यवस्था काफी हद तक सोंग नदी और उससे निकलने वाली कलिंगा नहर पर टिकी है। मानसून की शुरुआत में नहर ध्वस्त होने से खरीफ फसलों की सिंचाई पर संकट गहरा गया था। ऐसे में सिंचाई विभाग द्वारा रिकॉर्ड समय में नहर का पुनर्निर्माण करना केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों की आजीविका को बचाने वाला कदम साबित हुआ है।

प्रशासन द्वारा मानसून अवधि को देखते हुए सभी संवेदनशील क्षेत्रों की 24 घंटे निगरानी की जा रही है, ताकि किसी भी विपरीत परिस्थिति में त्वरित सहायता पहुँचाई जा सके।